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About APSM College
अयोध्या प्रसाद सिंह स्मारक महाविद्यालय, बरौनी (ए.पी.एस.एम.कॉलेज) की स्थापना पहली जून 1959 ई0 को हुई. यह महाविद्यालय 9 अगस्त 1977 ई0 से ललित मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के अंतर्गत अंगीभूत होकर अनवरत अपनी गरिमामयी परंपरा का निर्वहन करता आ रहा है. अंधविश्वास, छुआ-छूत, निरक्षरता पर्दा-प्रथा आदि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ संघर्ष कर समाज के अन्दर नई जागृति पैदा करने वाले समाज सुधारक बाबू अयोध्या प्रसाद सिंह जी की स्मृति में इस महाविद्यालय का नाम अयोध्या प्रसाद सिंह स्मारक महाविद्यालय, बरौनी (APSM College) रखा गया.
यह महाविद्यालय ज्ञान के अभिनव प्रकाश से न केवल बरौनी के औधोगिक एवं रेल क्षेत्र बल्कि सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों के तमाम वर्गों को आलोकित करने के ‘आत्म दीपो भव’ के संदेशो के साथ सतत् अग्रसर है.
इस महाविद्यालय के संस्थापक सचिव स्व0 शिवनाथ सिंह शर्मा की जिजीविषा एवं निर्माण की तकनीकी जानकारियों एवं दूरदर्शिता की वजह से झोपड़ी से अपनी यात्रा आरंभ करने वाला यह महाविद्यालय आज एक पर्यावरण-मित्र विशाल परिसर तथा अनेक सुव्यवस्थित एवं सुरक्षित भवनों, सुसज्जित प्रयोगशालाओं, विशाल खेल-मैदानों, मनोरम सरोवर एवं आकर्षक उद्यानों के साथ भव्य सांस्कृतिक मंच से परिपूर्ण है. परिसर के अन्दर स्थापित खूबलाल विज्ञान भवन, विद्यार्थियों के मनोरंजन के लिय ‘अप्रवासी छात्र केंद्र’ पुस्तकों से परिपूर्ण पुस्तकालय एवं छात्र-छात्राओं के लिए स्वतंत्र अध्ययन कक्ष, ‘शिवनाथ सिंह कला खण्ड’, स्वतंत्र विभागीय कक्षों एवं बलिनाथ सरोवर सहित दो विशाल खण्ड के मैदानों की उपलब्धता इसके शैक्षणिक, भौतिक परिदृश्य की सूचक है. परिसर के चारों ओर वृक्षारोपण, निर्माण और पर्यावरण का सुन्दर दृश्य प्रस्तुत करते हैं.

11.58 एकड़ में हरीतिमा युक्त तथा पुष्पों से आच्छादित एवं हाईमास्क की दुधिया रोशनी से आलोकित यह महाविद्यालय शहरी एवं ग्रामीण परिवेशों के संगम का प्रतीक है. बरौनी रेलवे स्टेशन से 1 कि0मी0 की दूरी पर मुख्य सड़क पर अवस्थित इस महाविद्यालय का पोषण क्षेत्र जहाँ पश्चिम-उत्तर में समस्तीपुर की सीमा से प्रारंभ होकर पूरब और दक्षिण में उर्वरकनगर, थर्मलपावर तथा बरौनी-गढ़हारा रेल प्रक्षेत्र के आवासीय परिसरों में रहने वाले देश के विभिन्न राज्यों के भाषा-भाषी परिवार के बच्चों के इस महाविद्यालय में अध्ययन करने की वजह से इसका स्वरुप मात्र ग्रामीण न होकर बहुभाषी तथा सांस्कृतिक विविधताओं से संपोषित है.
महाविद्यालय परिसर में होने वाले नियमित अध्यापन एवं अनुशासन की वजह से यहाँ से शिक्षित छात्र-छात्राओं में से अनेक स्कूल, कॉलेज शिक्षक, डॉक्टर, इंजीनियर के साथ-साथ प्रशासनिक एवं सैन्य क्षेत्र के महत्वपूर्ण पदों पर नियोजित हैं.

यहाँ के छात्र-छात्राओं ने खेल-कूद के क्षेत्र में भी अपनी पहचान विश्वविद्यालय, राज्य एवं राष्ट्र-स्तर के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर बनाई है. राष्ट्रीय पहचान बनाने वाले खिलाड़ियों में श्री राम निरंजन, सत्यदेव, स्व0 शिवशंकर (वाली वॉल), एस0एम0 अहमद अली एवं एस0एम0 इकबाल अली (टेबुल टेनिस) के साथ-साथ छात्राओं में मौसम, नीतू तथा रूबी जो सभी बरौनी गाँव से आती है, फुटबॉल में राष्ट्रव्यापी पहचान बनाई है. वीजिंग में सम्पन्न अन्तरराष्ट्रीय महिला फुटबॉल प्रतियोगिता में भारतीय टीम (19 वर्ष से कम आयु वर्ग) की खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने वाली ‘अन्नू’ इसी महाविद्यालय की थी. महाविद्यालय के सर्वांगीण विकास एवं अध्ययनरत छात्रों के बौद्धिक उन्यन के लिए योग्य शिक्षको के कुशल मार्गदर्शन में एन0सी0सी0 तथा एन0एस0एस0 की इकाई कार्यरत हैं. महाविद्यालय के कैडेट्स का गणतंत्र दिवस परेड के लिए चयन भी नियमित रूप से होता रहा है. यहाँ के प्रशिक्षित कैडेट्स ‘बी’ एवं ‘सी’ सर्टिफिकेट परीक्षा में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं. अपनी कार्यकुशलता के आधार पर वे राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में भी सफलता प्राप्त करते हैं तथा इनमे से कई छात्र-छात्राओं को पुलिस/सेना/नागरिक क्षेत्रों में मर्यादित नियोजन भी होता रहा है. राष्ट्रीय सेवा योजना की इकाई के माध्यम से छात्र-छात्राओं में राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता की पहचान कराते हुए समाज सेवा के प्रति उन्हें उत्प्रेरित किया जाता है. राष्ट्र एवं समाज से जुड़ी ज्वलंत समस्याओं के प्रति जागरूकता पैदा किए जाने हेतु शिविर लगाकर नियमित कार्यक्रम किए जाते हैं.

महाविद्यालय में आउटडोर एवं इंडोर खेलों के सम्बर्द्धन के लिए क्रीड़ा-समिति तथा छात्रों में कला एवं संस्कृति के प्रति अभिरुचि पैदा करने के लिए कला एवं संस्कृति-समिति क्रियाशील हैं. यहाँ विज्ञान, सामाजिक विज्ञान तथा मानविकी संकाय के विभिन्न विषयों की पढाई स्नातक प्रतिष्ठा स्तर तक की होती है. यू०जी०सी० संपोषित व्यवसायिक शिक्षा के रूप में औधोगिक रसायन (Industrial Chemistry) की प्रतिष्ठा स्तर तक की पढ़ाई भी सत्र 1996-97 से सफलतापूर्वक हो रही है.

इसके साथ-साथ महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को पढ़ाई एवं रोजगार से सम्बन्धित जानकारी हेतु एक Cell, जिसे Carrier Counseling Cell के नाम से जाना जाता है, इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बुलाकर पढाई एवं रोजगार से सम्बन्धित जानकारी दी जाती है. भाषा की प्रवीणता की दृष्टि से यहाँ लैंग्वेज लैब की स्थापना की गई है जहाँ छात्र-छात्रा भाग लेकर अंग्रेजी बोलने एवं लिखने में दक्षता प्राप्त कर सम्मानित आजीविका प्राप्त करने में सक्षम हो सकते हैं.
छात्र-छात्राओं के अलग-अलग काउंटर है जिससे अनावश्यक परेशानी से मुक्ति मिलती है. तो आईए, आप भी इस परिवार के सदस्य बनकर अपने उज्जवल भविष्य के मार्ग पर अग्रसर हों.